श्री चिंतामण गणेश मंदिर उज्जैन

उज्जयिनी (अवंतिका पुरी) म.प्र.

श्री चिंतामण गणेश मंदिर की वेबसाईट में आप का स्वागत है|

प्रातः 5 :00 से रात्रि 10:00 तक

प्रातः 7:00 चोला आरती

संध्या 7:30 भोग आरती

रात्रि 9:30 शयन आरती

जत्रा महापर्व - चैत्र मास में प्रत्येक बुधवार

गणपति महोत्सव - भाद्र पक्ष मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से अंनंत चतुर्दशी तक विशेष दर्शन एवं अनंत चतुर्दशी को चल समारोह

तिल महोत्सव- माघ मास में कृष्णपक्ष की संकष्टी चतुर्थी को सवा लाख तिल लड्डूओं का महाभोग

श्री चिंतामण गणेश मंदिर के बारे में जानकारी

अवंतिका के प्रसिद्ध श्री चिंतामण गणेश मंदिर में श्री गणेश के तीन रूपों की प्रतिमा बहुत प्राचीन है और यह चिंतामण गणेश प्रतिमा माता सीता द्वारा स्थापित षट् विनायकों में से एक है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान श्री राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ अवंतिका खंड के महाकाल वन में प्रवेश किया था तब अपनी यात्रा की निर्विघ्नता के लिए षट् विनायकों की स्थापना की थी । उन षट् विनायकों में से एक विनायक भगवान चिंतामण गणेश हैं । चिंतामण गणेश मंदिर एक विश्व प्रसिद्ध स्थल है और लोगों का यह विशवास है की यहां मन्नत मांगने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। chintamanganesh.com इस अद्भुत मंदिर की मूर्तियां स्वयंभू हैं, इसलिए यह सीढ़ियां उतरने के बाद नीचे गर्भगृह में स्थित है । गर्भगृह में प्रवेश करते ही हमें श्री गणेश की तीन प्रतिमाएं दिखाई देती है । सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा वाले श्री चिंतामण गणेश हैं, उसके पास में श्री इच्छामण गणेश (बीच में) और तीसरे हैं श्री सिद्धि विनायक । ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की पूजा स्वयं श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता ने की थी । यहां दर्शन करने से मन की चिंताएं दूर होती है। श्रद्धालु यहां अपनी श्रद्धा भक्ति से मन्नत के लिए धागा बांधते हैं और उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं । मान्यता के अनुसार इस मंदिर में मन्नत मांगने के लिए दूध, दहीं, चांवल और नारियल में से किसी एक वस्तु को चढ़ाया जाता है और जब वह इच्छा पूर्ण हो जाती है तब उसी वस्तु का यहां दान किया जाता है । वैसे तो इस मंदिर में रोज ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं लेकिन बुधवार के दिन दर्शन का विशेष महत्व होता है । प्रत्येक बुधवार एवं कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का दिन यहां पर्व की तरह मनाया जाता है । इसके अलावा चैत्र मास में भी प्रत्येक बुधवार को यहां मेला लगता है और सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया जाता है । गणेश चतुर्थी के समय यहां पर मुफ्त दूध वितरण भी किया जाता है । श्री चिंतामण गणेश मंदिर परमारकालीन मंदिर है और इसका पुनर्निर्माण होल्कर रियासत की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था । कोई भी शुभ कार्य जैसे नया व्यवसाय, विवाह, इत्यादि में सबसे पहले इस मंदिर में पूजन-अर्चन कर कार्य निर्विघ्न संपन्न होने का आशीर्वाद लिया जाता है । इस मंदिर के शिखर पर सिंह विराजमान है । मंदिर के सामने एक अतिप्राचीन बावड़ी है जिसे लक्ष्मण बावड़ी कहा जाता है । बावड़ी करीब ८० फ़ीट गहरी है । श्री चिंतामण गणेश मंदिर शहर से लगभग ८ किलोमीटर दूर फतेहाबाद की और जाने वाली रेलवे लाइन के पास है और यहां आने के लिए सिटी बस भी उपलब्ध है । चिंतामण गणेश मंदिर आने के लिए मीटर गेज ट्रेन भी दिन में तीन बार उपलब्ध है । वैसे अधिकाँश भक्तगण सड़क मार्ग से ही अपने-अपने साधनों से यहां पहुंचतें हैं ।

कैसे पहंचे :

निकटतम रेल्वे स्टेशन यहाँ से करीब 8 किलोमीटर दूर है|
निकटतम बस स्टेशन यहाँ से करीब 8 किलोमीटर दूर है|
निकटतम हवाई अड्डा इंदौर यहां से करीब 60 किलोमीटर दूर है।
ठहरने के लिए यहां होटल और धर्मशालाएं भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं।