इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप मराठा काल में परम धर्मनिष्ठ महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित कराया गया था।
इससे पूर्व भी परमार काल में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा चुका है।
मंदिर के प्राचीन स्तंभ आज भी उस युग की स्थापत्य कला और धार्मिक विरासत के साक्षी हैं।