मंदिर समय: प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक
Shri Chintaman Ganesh, Ujjain (M.P) - 456006

श्री चिंतामन गणेश मंदिर, उज्जैन

उज्जैन स्थित श्री चिंतामन गणेश मंदिर अत्यंत प्राचीन और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहाँ भगवान गणेश की तीन स्वरूपों में पूजा की जाती है—चिंतामन गणेश, इच्छामन गणेश और सिद्धिविनायक गणेश।

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Chintamanganesh

मंदिर का परिचय

उज्जैन की पावन एवं आध्यात्मिक भूमि पर स्थित श्री चिंतामन गणेश मंदिर भगवान गणेश के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर शिप्रा नदी के निकट स्थित है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था एवं विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

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श्री चिंतामण गणेश के तीन दिव्य स्वरूप

इस पावन मंदिर में भगवान गणेश के तीन अद्भुत और चमत्कारी स्वरूप एक साथ विराजमान हैं—

  • श्री चिंतामन गणेश: भक्तों की समस्त चिंताओं का हरण करते हैं
  • श्री इच्छामन गणेश: सच्चे मन से की गई हर इच्छा को पूर्ण करते हैं
  • श्री सिद्धिविनायक गणेश: रिद्धि-सिद्धि, सुख-समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद देते हैं
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आरती का समय

चोला आरती का समय

प्रातः 7:00 बजे

भोग आरती का समय

संध्या 7:30 बजे

शयन आरती का समय

रात्रि 9:30 बजे

उत्सव एवं आयोजन (Events) Temple Festivals

जत्रा महापर्व

चैत्र मास के प्रत्येक बुधवार को यहां विशेष जत्रा आयोजित होती है। ग्रामीण और शहरी श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।

गणपति महोत्सव

इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, आकर्षक श्रृंगार और भव्य आयोजन किए जाते हैं।

तिल महोत्सव

माघ मास में तिल चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को तिल का विशेष भोग अर्पित किया जाता है।

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How to Reach Us

Railway Station

Railway Station

मंदिर उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 8 किमी दूर स्थित है।

Bus Station

Bus Station

उज्जैन बस स्टैंड से यह मंदिर करीब 8 किमी की दूरी पर है।

Airport

Airport

निकटतम हवाई अड्डा इंदौर है, जो लगभग 60 किमी दूर है।

पौराणिक महत्व

यह स्थल प्राचीन काल से ही आस्था का केंद्र रहा है। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी वनवास के दौरान इस पवित्र स्थान पर पधारे थे।

माता सीता को प्यास लगने पर लक्ष्मण जी ने अपने बाण से भूमि से जल प्रकट किया, जिससे यहां एक पवित्र बावड़ी का निर्माण हुआ।

ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री राम ने यहां चिंतामन गणेश, लक्ष्मण जी ने इच्छामन गणेश तथा माता सीता ने सिद्धिविनायक गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की थी।

विशेषताएं

श्री चिंतामण गणेश मंदिर की प्रमुख विशेषताएं

स्वयंभू गणेश

यहाँ गणेश जी की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई मानी जाती है।

मनोकामना पूर्ति

भक्तों की सभी इच्छाएं यहाँ पूर्ण होती हैं।

धार्मिक महत्व

यह मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।

मंदिर का इतिहास

परमार काल

मंदिर का प्रारंभिक जीर्णोद्धार

मराठा काल

महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा वर्तमान स्वरूप

वर्तमान

प्राचीन स्तंभ आज भी विरासत के साक्षी

इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप मराठा काल में परम धर्मनिष्ठ महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित कराया गया था।

इससे पूर्व भी परमार काल में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा चुका है।

मंदिर के प्राचीन स्तंभ आज भी उस युग की स्थापत्य कला और धार्मिक विरासत के साक्षी हैं।

धार्मिक परंपराएं एवं मान्यताएं

सदियों से चली आ रही दिव्य परंपराएं

उल्टा स्वास्तिक

भक्त मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं।

सीधा स्वास्तिक

इच्छा पूर्ण होने पर पुनः आकर सीधा स्वास्तिक बनाकर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

रक्षा सूत्र (मौली)

श्रद्धालु यहां मौली बांधते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर उसे खोलने आते हैं।

लग्न पत्रिका

विवाह के शुभ अवसर पर परिजन यहां लग्न पत्रिका अर्पित करते हैं।

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